रोटी ओवन में जाते ही टाइमर लगाती हूं, और जब तक टाइमर बजे तब तक एक पैर पर खड़े रहने की कोशिश करती हूं।
शुरू में तो यह बहुत अजीब लगा, हाथ दीवार पर टिकाना पड़ता था, वरना गिरने जैसा लगता था।
फ्रीलांस का काम कभी बहुत आ जाता है कभी बिल्कुल नहीं, तो जिम या रेगुलर एक्सरसाइज़ का रूटीन बनाना मेरे लिए मुश्किल ही रहा है।
डॉक्टर ने बस इतना कहा था कि पैरों और कमर की मसल्स कमज़ोर हो गई हैं, धीरे-धीरे बढ़ानी होंगी।
तो सोचा जो रोज़ करती ही हूं उसी के साथ कुछ जोड़ दूं, रोटी बनाना तो रोज़ का काम है ही।
पहले कुछ दिन तो पूरा टाइम हाथ दीवार पर ही रहा।

अब धीरे-धीरे हाथ हटाकर भी थोड़ी देर खड़ी हो पाती हूं, गिरती भी उतना नहीं अब।
हिसाब की कॉपी फिर से लिखना शुरू किया है इन दिनों, उसी में एक कोने में यह भी लिख देती हूं कि आज कौन सा पैर ज़्यादा कमज़ोर लगा, तो दोनों तरफ का फर्क भी दिख जाता है।
कुछ बड़ा प्लान नहीं बनाया, बस रोज़ के काम में से एक जगह चुन ली जहां शरीर पर थोड़ा ध्यान जा सके।
