सुबह से शाम तक खड़े रहकर काम करना पड़ता है, देर होते होते पैर एकदम भारी हो जाते थे। घर आकर जूते उतारने पर मोज़ों के निशान गहरे पड़े दिखते।
काम की जगह पर पैरों के नीचे एक (नरम रबर वाली मैट) बिछानी शुरू की, पड़ोस की दीदी ने सुझाया था।
– शुरू में लगा शायद कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा
– शाम तक पैर उतने भारी नहीं लगे जितने पहले लगते थे
– एड़ियों में जो हल्का दर्द रहता था वो भी अब कम है
– मैट भारी है इसलिए घर नहीं ले जाती, वहीं छोड़ देती हूं
वीकेंड पर ट्रेकिंग जाती हूं तो वहां भी पैर उतनी जल्दी नहीं थकते।
कुल मिलाकर सोचा था उससे ज़्यादा फर्क पड़ा।
