रात को सोने से पहले अगले दिन का काम लिख कर रखना शुरू किया है।
पहले क्या होता था – रात 11 बजे बिस्तर पर लेटने के बाद दिमाग में सुबह की क्लास, शाम की शिफ्ट और किराने का हिसाब एक साथ घूमता था।
अब सोने से 20 मिनट पहले एक कागज़ पर तीन चीज़ें लिखती हूं – कल क्या पढ़ना है, कौन सी शिफ्ट है, और घर से क्या सामान हटाना है।
बुनाई की टोकरी के पास ही वो कागज़ और पेन रखा है, तो उसी समय लिख लेती हूं।
2 हफ्ते से ऐसा कर रही हूं। चिंता पूरी तरह नहीं गई है, लेकिन रात को बार-बार वही बातें दोहराना कम हो गया है।
एक बार कागज़ पर आ गया तो दिमाग उसे छोड़ देता है, ऐसा महसूस होता है।
कल रात भी यही किया – लिस्ट में तीन लाइन लिखी, लाइट बंद की, और उतनी देर नहीं जागी जितनी पहले जागती थी।
सामान छाँटने का हिसाब भी इसी कागज़ पर रहता है तो वो अलग से याद नहीं रखना पड़ता।
