काम के हिसाब की डायरी 2 बारा लिखना शुरू की, तो उसी कॉपी के आखिरी पन्ने पर एक और चीज़ भी लिखने लगी, जिस दिन डॉक्टर की सलाह से स्टेरॉयड की खुराक थोड़ी कम करती हूं, उस तारीख के आगे छोटा निशान लगा देती हूं, और उसके बाद 3 दिन तक खुजली कैसी रही, नींद कैसी रही, बस एक-दो शब्द में लिख देती हूं, जैसे ‘हल्की’, ‘ज़्यादा’, ‘ठीक’ वैसा।
पिछले 2 महीने में 4 बार खुराक कम की, और हर बार देखा कि तीसरे दिन के आसपास खुजली थोड़ी लौट आती है, फिर चौथे-पांचवें दिन अपने आप कम हो जाती है, पहली बार ऐसा हुआ तो घबरा गई थी, लगा कहीं कुछ गलत हो रहा है,
पर कॉपी में लिखा हुआ पैटर्न देखकर समझ आया कि यह हर बार साथ आने वाली बात है, अलग से कोई नई समस्या नहीं।
रात की नींद का हिसाब भी वहीं लिख रही हूं, कितने बजे उठी, दोबरा सो पाई या नहीं, सुबह थकान कितनी रही, काम ज़्यादा हो तो हफ्तों तक लिखना भूल जाती हूं, फिर काम कम होने पर पकड़ लेती हूं, पूरा महीना खाली रहने पर भी यही होता है, किसी चीज़ में मन नहीं लगता तब।
कागज़ पर देखने से एक फ़ायदा यह हुआ कि डर कम हुआ, खुजली लौटी तो भी समझ आता है कि यह कब तक रहेगी, और कब अपने आप शांत हो जाएगी।
