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[किया] आटा फूलने के दौरान पंजों पर खड़ा होना आज़माया

रोटी का आटा गूंधने के बाद जब वो फूलने के लिए रखा रहता है, वो थोड़ी देर बस ऐसे ही निकल जाती थी।

रसोई में खड़े-खड़े सोचा कि इतनी देर में कुछ और भी तो किया जा सकता है, तो पंजों पर खड़ा होना शुरू किया।

ओटे पर हाथ टिका लिए, धीरे से एड़ी ऊँची करके खड़ी होती, फिर नीचे। बीच में पिंडलियों में खिंचाव सा महसूस होता है, साँस भी थोड़ी तेज़ हो जाती।

हिसाब की कॉपी में ये भी लिख दिया, ताकि कब से शुरू किया याद रहे। काम ज़्यादा हो तो दिन भर कुर्सी पर ही बीत जाता है, तो आटा फूलने का यही टाइम अभी तक का सबसे ठीक वक़्त लग रहा है।

रोज़ नहीं हो पाता, कभी आटा जल्दी फूल जाता है तो बस इतना ही हो पाता है। जितना भी हो जाए, उतना अच्छा लगता है।

कमेंट 6

  • गुलाबीधूप10.16

    मुझे भी बर्तन धोते वक्त ऐसा खिंचाव महसूस होता है

  • दिल से10.16

    रोटी का आटा फूलने में आपको कितना वक़्त लगता है, मैं भी बनाती हूँ पर ये तरीका कभी नहीं सोचा

  • → दिल सेमुस्कानलेखक10.17

    थोड़ी देर ही लगती है

  • चाँदनी रात10.16

    मुझे लगता है इतनी देर खड़े रहने से कमर पर जोर पड़ सकता है, मैं बैठकर पंजे घुमाती हूँ!

  • → चाँदनी रातमुस्कानलेखक10.16

    कमर पर जोर नहीं लगा अब तक, ओटे पर हाथ टिका के खड़ी होती हूँ तो सहारा मिल जाता है

  • खुशबू10.16

    थोड़ी देर करें तो कमर पर ज़्यादा जोर नहीं पड़ेगा

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