परामर्श, व्याख्यान, किताबें, कलाकृतियाँ, मीटअप, प्रबंधन — कुछ भी चलेगा। बस कृपया वही लिखें जो आपने खुद अनुभव किया हो। सुनी-सुनाई बातें समीक्षा नहीं होतीं। सिर्फ अच्छी बातें लिखना भी ज़रूरी नहीं है।
जो कमियाँ महसूस हुईं, वे भी लिखें ताकि पढ़ने वाले को अंदाज़ा हो सके कि यह उनके लिए सही है या नहीं। अगर इसमें पैसों का लेन-देन हुआ हो, तो कृपया यह बात भी बताएं। अगर आपको यह मुफ़्त में मिला था या इसके बदले कुछ मिला था, तो वह भी लिखें।
बिना कुछ छिपाए लिखी गई समीक्षा सबसे भरोसेमंद होती है।
